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फिलीपींस में राजनाथ सिंह का बड़ा बयान: रक्षा सहयोग और विश्वास को लेकर दिया ये संदेश
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में फिलीपींस की अपनी महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान एडीएमएम-प्लस (ADMM-Plus) बैठक में हिस्सा लिया। इस उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करते हुए भारत के पक्ष को मजबूती से रखा। राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में शांति बनाए रखने के लिए रक्षा सहयोग (Defense Cooperation) और देशों के बीच आपसी विश्वास को और अधिक गहरा करने की आवश्यकता है।
एडीएमएम-प्लस बैठक और भारत का दृष्टिकोण
एडीएमएम-प्लस एक ऐसा मंच है जहाँ आसियान (ASEAN) देशों के साथ-साथ उनके आठ संवाद भागीदार, जिनमें भारत भी शामिल है, सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर संवाद करते हैं। राजनाथ सिंह ने इस मंच का उपयोग करते हुए यह संदेश दिया कि शांतिपूर्ण भविष्य के लिए रणनीतिक साझेदारी का होना अनिवार्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल बातचीत से ही समस्याओं का समाधान संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए ठोस रक्षा सहयोग (Defense Cooperation) और क्रियान्वयन की भी जरूरत है।
भारत हमेशा से ही ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना में विश्वास रखता आया है, और रक्षा मंत्री का यह दौरा उसी दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए सभी सदस्य देशों को एक साथ आने का आह्वान किया।
रक्षा सहयोग (Defense Cooperation) को मजबूत करने की जरूरत
रक्षा मंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि सुरक्षा की चुनौतियां अब किसी एक देश तक सीमित नहीं रह गई हैं। आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और साइबर खतरों जैसे मुद्दों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रक्षा सहयोग (Defense Cooperation) की नींव रखना आवश्यक है। जब तक विभिन्न राष्ट्र अपनी रक्षा क्षमताओं और सूचनाओं को साझा नहीं करेंगे, तब तक वैश्विक शांति का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन होगा।
फिलीपींस में उनके संबोधन के दौरान यह बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी भूमिका को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने रक्षा प्रणालियों के आधुनिकीकरण और संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से रक्षा सहयोग (Defense Cooperation) को अगले स्तर पर ले जाने की बात कही।
आपसी विश्वास (Mutual Trust) पर विशेष जोर
किसी भी गठबंधन या सहयोग की सफलता की पहली शर्त आपसी विश्वास होती है। राजनाथ सिंह ने कहा कि देशों के बीच जब तक विश्वास की कमी रहेगी, तब तक किसी भी रक्षा संधि या समझौते का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे अपनी नीतियों में पारदर्शिता लाएं ताकि रक्षा सहयोग (Defense Cooperation) को बिना किसी झिझक के आगे बढ़ाया जा सके।
फिलीपींस में भव्य स्वागत और बैठक के मुख्य बिंदु
फिलीपींस पहुंचने पर भारतीय रक्षा मंत्री का भव्य स्वागत किया गया और उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (Guard of Honour) भी दिया गया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच बढ़ते प्रगाढ़ संबंधों का प्रतीक है। बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई जो निम्नलिखित हैं:
- क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास करना।
- समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करना।
- आतंकवाद विरोधी अभियानों में एक-दूसरे की मदद और रक्षा सहयोग (Defense Cooperation) बढ़ाना।
- तकनीकी आदान-प्रदान के माध्यम से सैन्य क्षमताओं को सुदृढ़ करना।
- आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाना।
क्षेत्रीय शांति और समुद्री सुरक्षा का महत्व
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है। राजनाथ सिंह ने इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने के महत्व को दोहराया। उन्होंने कहा कि खुला और समावेशी समुद्री क्षेत्र तभी संभव है जब सभी देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करें। इसके लिए मजबूत रक्षा सहयोग (Defense Cooperation) तंत्र का होना बहुत जरूरी है।
भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत फिलीपींस और अन्य आसियान देशों के साथ संबंध और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस बैठक के जरिए भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी रक्षा सीमाओं के बाहर भी शांति का पक्षधर है और इसके लिए हर संभव सहयोग करने को तैयार है।
निष्कर्ष और भविष्य की दिशा
राजनाथ सिंह की यह यात्रा और एडीएमएम-प्लस बैठक में दिया गया उनका संदेश भारत की उभरती वैश्विक शक्ति का प्रमाण है। उन्होंने न केवल रक्षा सहयोग (Defense Cooperation) की आवश्यकता जताई, बल्कि विश्वास बहाली के जरिए एक सुरक्षित विश्व की कल्पना भी पेश की। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन बैठकों के परिणाम स्वरूप क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में क्या बदलाव आते हैं।
भारत का उद्देश्य हमेशा से ही न्यायसंगत और नियम-आधारित व्यवस्था बनाना रहा है। रक्षा मंत्री के इस दौरे ने रक्षा कूटनीति के क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव को एक नई ऊंचाई दी है।
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