भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग और उनकी कथा – द्वादश ज्योतिर्लिंग से जुड़े रहस्य
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग (12 Jyotirlinga) और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं की पूरी जानकारी। श्रावण माह में ज्योतिर्लिंग यात्रा के लिए उपयोगी तथ्य और महत्व।
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भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग (12 Jyotirlinga) और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं की पूरी जानकारी। श्रावण माह में ज्योतिर्लिंग यात्रा के लिए उपयोगी तथ्य और महत्व।
Continue Readingरुद्र सूक्त को हमारे शास्त्रों में अमृत प्राप्ति का एक विशेष साधन बताया गया है। सावन के महीने में रुद्र सूक्त Rudra Suktam in Hindi Arth Sahit का पाठ करके शिव जी को अभिषेक
Continue Readingभगवान शंकर द्वारा लिए गए 19 अवतारों का उल्लेख शिव पुराण मे मिलाता है जिसमें 1. वीरभद्र, 2. पिप्पलाद, 3. नंदी अवतार, 4. भैरव, 5. अश्वत्थामा, 6. शरभावतार, 7. गृहपति अवतार
Continue Readingपांडवों ने पापों से मुक्त होने के लिए केदारनाथ धाम की स्थापना की थी। इस धाम की स्थापना करने में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था, क्योंकि महादेव पांडवों से मिलना ही नहीं चाह रहे थे,
Continue Readingगणगौर त्योहार में जो भी सुहागन स्त्री इस दिन पूजा करती है उसे मां पार्वती अखंड सौभाग्य का वर देती हैं, वही जो कुंवारी लड़की व्रत और विधि के साथ पूजा करती है उसे मनचाहा पति मिलता है।
Continue Readingप्रभु दर्शन ऐप का उद्देश्य हिंदुत्व के दुर्लभ खजाने को दुनिया के कोने-कोने में फैले हिंदुओं तक पहुंचाना है। ईश्वर की प्रेरणा से इसकी नींव पड़ी. अब आप जैसे प्रभु भक्तों के मार्गदर्शन से इसे ज्यादा से ज्यादा उपयोगी बनाना है। आपके सुझावों और विचारों की प्रतीक्षा रहेगी। प्रभु के दर्शन को समर्पित इस मोबाइल […]
Continue Readingयदि कोई मनुष्य सच्ची श्रद्धा भक्ति से शिवलिंग पर सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित करे तो भी शिवजी प्रसन्न हो जाते हैं। इनकी भक्ति करने वाले व्यक्ति को संसार की सभी वस्तुएं प्राप्त हो जाती हैं।
Continue Readingशिव तांडव स्तोत्र अर्थ सहित। आर्थिक समस्या से भी उबरने के लिए शिव तांडव का पाठ करना शुभ साबित होता है। जीवन में विशेष उपलब्धि पाने के लिए भी शिव तांडव स्तोत्र रामबाण का काम करता है। जब बुरे ग्रह के दोष से मुक्ति पाने के शिव तांडव का पाठ करना अत्यधिक लाभकारी होता है।
Continue Readingश्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा……