बंगाल alpan bandhopadhyay

बंगाल में फिर से हो रहा है राजनीतिक हंगामा

भारत राजनीति

बंगाल में एक बार फिर से सियासी बवाल शुरू हो गया है लेकिन इस बार यह बवाल कोई इलेक्शन को लेकर नही बल्कि बंगाल के मुख्य सचिव को लेकर हो रहा है। यह राजनीतिक हंगामा फिर से एक बार केन्द्र और राज्य सरकार के बीच शुरू हो चुका है और यह हंगामा चक्रवाती तूफान यास के बाद शुरू हुआ। दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को चक्रवाती तूफान यास को लेकर कोलकाता में एक मीटिंग बुलाई थी जिसमें बंगाल के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय नदारद थे। इस घटना के बाद केन्द्र सरकार ने एक कङा फैसला लिया और मुख्य सचिव को तत्काल रीलिव करने के आदेश दे दिया। केन्द्र सरकार के इस सख्त कदम के बाद मानो जैसे बंगाल में फिर से एक बार केन्द्र और राज्य सरकार के बीच घमासान छिङ गया है।

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क्या है पूरा मामाला?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बंगाल में आये चक्रवाती तूफान यास को लेकर एक बैठक बुलाई थी जिसमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय करीबन आधा घण्टा देर से पहुँचे थे, इतना ही नहीं बैठक में कुछ देर रुकने के बाद ममता कुछ कागजात देकर वहाँ से निकल गई उस वक्त भी उनके साथ अलपन मौजूद थे। ममता ने बताया की चक्रवात यास के कारण राज्य में नुकसान की रिपोर्ट केन्द्र को सौंप दी गयी है। बता दे कि ममता ने केन्द्र को जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें प्रभावित इलाको के निर्माण के लिए 20,000 करोङ रुपये पैकेज की मांग की है।

बैठक में देर से पहुँचने और वहाँ से अचानक निकल जाने के इस रवैये को देखकर केन्द्र सरकार ने बंगाल के मुख्य सचिव के खिलाफ एक कङा निर्णय लिया है। दरअसल मुख्य सचिव अलपन को 31 मई की सुबह को 10 बजे से पहले रिपोर्ट करने को कहा गया था। लेकिन अलपन की जगह ममता ने एक चिट्ठी भेजी जिसमें साफ साफ कहा गया था कि बंगाल मे आये हुए मुश्किल समय में सरकार अपने मुख्य सचिव को नही भेज सकती है। बंगाल के मुख्यमंत्री के इस रुख के बाद अब अलपन के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इतना ही नहीं ममता ने केन्द्र सरकार को अलपन के दिल्ली में रिपोर्ट करने के आदेश को वापस लेने को कह दिया क्योकि अलपन को सोमवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में शामिल होना था।

बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय का कार्यकाल समाप्त हो चुका था और ममता ने तीन माह के लिए इनका कार्यकाल बढा दिया था। वैसे तो अलपन को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी भी माना जाता है। केन्द्र सरकार द्वारा जारी किये गए आदेश के अनुसार अब अलपन को केन्द्र में नई जिम्मेदारी दी जायेगी। लेकिन ममता भी कहां पीछे रहने वालो मे से थी, उन्होने अपना अलग ही दाव चलना शुरू कर दी। मुख्य सचिव अलपन जिनका कार्यकाल समाप्त हो चुका था उन्हे अपना मुख्य सलाहकार बनाने का ऐलान कर दिया। मंगलवार से ही अलपन ने ममता के मुख्य सलाहकार के रुप में काम करना शुरू भी कर दिया।

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बंगाल का नया मुख्य सचिव किसे नियुक्त किया गया है?

अलपन बंदोपाध्याय का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बंगाल के नये मुख्य सचिव के तौर पर हरिकृष्ण द्विवेदी को नियुक्त किया गया है। हरिकृष्ण द्विवेदी उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के रहने वाले है। बंगाल में फाइनेन्स सेक्रेटरी और होम सेक्रेटरी का पद सम्भालने के बाद हरिकृष्ण द्विवेदी को अब बंगाल के मुख्य सचिव के रुप में नियुक्त किया गया है।

सरकार द्वारा अलपन बंदोपाध्याय को नोटिस भेजे जाने पर ममता ने केन्द्र सरकार को अपने फैसले को वापस लेने का अनुरोध कर रही है। ममता ने यह कह कर अलपन का बचाव कर रही है कि एक मुख्य सचिव होने के नाते उनका काम था कि वह मेरी मदद करे और वह बस अपना काम कर रहे थे। इसमें उसकी क्या गलती है? यह कहते हुए केन्द्र सरकार पर निशाना कस दिया है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इस विवाद पर अपना विचार रखते हुए कहा कि यह समय लङाई झगङा करने का नहीं है, बल्कि साथ मिलकर देश में आये हुए समस्या का समाधान करना है। अरविन्द केजरीवाल ने केन्द्र और राज्य दोनो सरकार को एक साथ होकर काम करने तक का सुझाव दे दिया। केजरीवाल अपने ट्वीट में कहते है कि राजनीतिक लङाई झगङे के लिए तो पूरी जिन्दगी पङी है अभी इस समय एकजुट होकर टीम इंडिया के तरह काम करना है। अपने ट्वीट के जरिए यह भी बात कही की कोविड-19 और चक्रवाती तूफान यास के कारण अलपन अपनी सेवायें बतौर मुख्य सचिव हुए भी जारी रख सकते है।

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3 thoughts on “बंगाल में फिर से हो रहा है राजनीतिक हंगामा

  1. IAS cadre rule 1954 ke anusar transfer posting per Koi dispute hone per Central Government ka order final Mana Jayega Mamta Bano service rule per Kyon penic Paida kar rahi hai union government ko Supreme Court mein appeal karne chahie vahin per Dudh ka dudh Pani Ka Pani hoga Uske Jhooth ke Pol khul Jayegi

  2. All terminal benefits of officer after retirement to be put on hold. Legal proceedings to be initiated immediately. Explanation to be asked to him via mail.

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