IAS Ennis Kanmani

IAS एनीस की सफलता की कहानी : किताबें और नोट्स नहीं होने पर अखबार पढ़कर बनी कलेक्टर

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लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। इस कहावत को केरल की एनीस कनमनी जॉय ने चरितार्थ कर दिखाया है। एक पुरानी कहावत बेहद मशहूर है जब किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात भी उसे आपके कदमों तक लाने में जुट जाती है। कुछ ऐसा ही केरल (Kerala) की एनीस कनमनी जॉय (Ennis Kanmani Joy) के साथ हुआ। जिनका सपना था कि वह आईएएस (IAS) बने, लेकिन गरीबी के चलते एनीस को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ा। परेशानियों से लड़ते हुए भी एनीस आज आईएएस (IAS) के पद पर पदस्थ है। जिन्होंने एक मिसाल पेश की है, जी हां एनीस गरीबी के चलते किताब नहीं खरीद पाती थी इसलिए वह अखबार पढ़कर आईएएस बनी है। जो सभी के लिए एक बेहद प्रेरणादायक है। आज हर कोई उनकी काबिलियत की तारीफ कर रहा है। जिन्होंने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। अभी तक जितने भी आईएएस (IAS) या आईपीएस अधिकारियों को हमने सुना है वो सभी का यही कहना है कि उन्होंने जी जान लगाकर पढ़ाई की, जिसके लिए उन्होंने कई तरह की किताबें पढ़ी और कई लोगों ने अच्छी इंस्टिट्यूशन से कोचिंग भी किया। लेकिन एनीस कनमनी की कहानी अलग है, जो केवल अखबार पढ़कर आईएएस (IAS) बनी है। जिनकी आज हर कोई सराहना कर रहा हैं, क्योंकि एनीस ने तो इतिहास रच दिया है। आइए जानते हैं आईएएस एनीस की सफलता (IAS Ennis success) की कहानी।

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किसान की बेटी न्यूज पेपर पढ़कर बनी आईएएस

एनीस कनमनी (Ennis Kanmani Joy) केरल (Kerala) के पिरवोम के एक छोटे से गांव की रहने वाली है, जिनके पिता किसानी का काम करते है और माता खेतों में मजदूरी करती है। गरीबी के चलते घर में दो वक्त का खाना नसीब हो जाए यही बेहद बड़ी बात थी, ऐसी स्थिति में एनीस (Ennis) को यूपीएससी के एग्जाम (UPSC exams) की तैयारी करने के लिए ना ही अच्छी कोचिंग मिल सकी और ना ही नोट्स मिल सके। एनीस के लिए ये सारी चीजें दूर के ढोल थे। इन सभी हालातों को देखते हुए भी एनीस ने हार नहीं मानी और यूपीएससी (UPSC) की तैयारी में जुट गई। एनीस (Ennis) को जहां से कुछ भी पढ़ने को मिला वह सब पढ़ने लगी। ज्यादातर वह अखबार पढ़ती थी और खुद को देश दुनिया की खबरों से अपडेट रखती थी। इसी के चलते एनीस ने दूसरी बार में ही यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पास कर आईएएस (IAS) बनी है।

एनीस का बचपन से था डॉक्टर बनने का सपना, लेकिन नहीं हो सका पूरा

एनीस (Ennis) ने बताया कि वह कक्षा दसवीं तक अपने गांव में ही पढ़ाई की है और 12वीं तक की पढ़ाई एर्नाकुलम में पूरी की। एनीस (Ennis) को बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था, लेकिन यह सपना पूरा नहीं हो सका। एनीस (Ennis) ने एमबीबीएस (MBBS) में चयन के लिए काफी मेहनत की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। जिसके बाद उन्होंने बीएससी नर्सिंग कर नर्स बनी और अपना काम शुरू कर दिया। एनीस को बचपन से ही कुछ बड़ा करने का सपना था, जिसके चलते वह नर्स के काम से खुश नहीं थी और आगे बढ़कर कुछ अच्छा करना चाहती थी। जिससे वे समाज में पीड़ित और जरूरतमंद लोगों की मदद कर सके।

आईएएस की परीक्षा के लिए ट्रेन में मिले लोगों ने किया प्रेरित

अपने आगे की करियर को लेकर उलझन उसे भरी एनीस को ट्रेन में दो लोग मिले। जिन्होंने एनीस की पढ़ाई को लेकर बातचीत की। इस दौरान एनीस की पढ़ाई की तरफ लगाव देखकर उन दोनों लोगों ने एनीस को सिविल सर्विस की परीक्षा (Civil service exam) देने की सलाह दी। इन्हीं दोनों लोगों से प्रेरित होकर एनीस को लगा कि वह आईएएस की परीक्षा (IAS Exam) देकर सफल हो सकती है, जिसके बाद वह अपना ध्यान केंद्रीत कर यूपीएससी की तैयारी (UPSC Preparation) में जुट गई।

गरीबी इतनी की किताबों और नोट्स के लिए नहीं थे पैसे

यूपीएससी की तैयारी (UPSC Preparation) करना आसान बात नहीं है। इसके लिए अलग-अलग किताबों और करंट अफेयर से जुड़े पत्रिकाओं को पढ़ना पड़ता है, लेकिन गरीबी ऐसी की एनीस के पास ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। एनीस की सबसे बड़ी परेशानी तो यही थी कि उसके पास ना तो किताबे थी और ना ही नोट्स थे। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जो महत्वपूर्ण पत्रिकाएं लेने के भी पैसे नहीं थे। जिनके बिना परीक्षा की तैयारी करना असंभव सा लग रहा था। इन सभी हालातों को देखते हुए एनीस ने इसका हल निकाला और उन्होंने सोचा कि वह केवल न्यूजपेपर पढ़कर ही परीक्षा की तैयारी करेगी। फिर क्या था एनीस प्रतिदिन अखबार को पड़ने लगी और दूसरे प्रयास में भी आईएएस बनी है।

दूसरी बार में ही मिली एनीस को सफलता

अपनी सफलता की कहानी को साझा करते हुए एनीस ने बताया कि वह न्यूजपेपर के एडिट पेज और करेंट अफेयर पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करती थी। जिसकी मदद से उन्हें सरकार की सभी योजनाओं और सुविधाओं के अलावा कई तरह की नई जानकारियां भी मिलती रही। एनीस ने जब पहली बार यूपीएससी का एग्जाम दिया तो उनका 580 रैंक आया था। जिसके बाद 2011 में एनीस ने दूसरी बार फिर से प्रयास किया और उन्होंने 65वीं रैंक हासिल हुआ। जिसके बाद वह आईएएस के पद पर पदस्थ है।

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वर्तमान में एनीस कोडागु जिले की है डिप्टी कमीश्नर

वर्तमान समय में एनीस कनमनी रॉय केरल के मेहनती और तेज तर्रार आईएएस अफसरों में जानी जाती है। पूरे देश में कोरोना महामारी ने हाहाकार मचा कर रखा हुआ है। ऐसे में एनीस बेहद अच्छा काम कर रही है, जिसे लेकर सराहना भी हो रही है। वर्तमान में एनिस केरल के कोडागु जिले की डिप्टी कमिश्नर है और वह कोरोनावायरस के खिलाफ बेहतरीन काम कर रही है। एनीस ने आसपास के लोगों को जागरूक कर कोविड के केसों में कमी लाई है। जिसके चलते आज कोडागु जिला देश के उन जिलों में शामिल हुआ है, जहां पिछले 28 दिनों से कोविड-19 से पीड़ित कोई भी मरीज नहीं मिला हैं।

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