women rights given by government

महिलाओं के लिए सरकार ने बनाएं है सुरक्षा और समानता का अधिकार, क्या आपको है इसकी जानकारी

भारत

हमारे देश में महिला और पुरूष को समान अधिकार मिला है, लेकिन हमारा देश ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में बटा हुआ है। जहां ग्रामीण क्षेत्र के महिलाओं को अपने अधिकार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। जिससे चलते उन्हें कई तरह के समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं को सुरक्षा और समानता से संबंधित कानूनी अधिकारों को लेकर हमेशा जागरूक रहना चाहिए। जिससे उनको समाज में समानता का अधिकार (Right to equality) मिल सके और वे भी अपने अधिकारों का उपयोग करके अपने साथ होने वाले उत्पीड़न से बच सके। अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं घरेलू हिंसा (Domestic violence) का शिकार होती है, साथ ही वर्क प्लेस में भी उन्हें कई तरह की समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। ऐसे में उनके लिए बेहद जरूरी है कि उन्हें समानता के अधिकार (Right to equality) की पूरी जानकारी होनी चाहिए। इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि महिलाओं को किन किन कानूनी अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए, जिससे आपको बेहद मदद मिलेगी। वैसे तो हम सभी जानते है कि हमारे कानून में महिलाओं और पुरूषों को समान अधिकार दिया गया है। इसके बावजूद भी महिलाओं को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है। जिसमें महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा (Domestic violence) के मामले सामने आते है, क्योंकि महिलाओं को अपने समानता के अधिकार (Right to equality) की जानकारी सही तरीके से नहीं होती है। जिसके कारण उन्हें हमेशा पुरूषों की तुलना नीचे समझा जाता है। ऐसे में उन्हें समानता के अधिकार (Right to equality) के कानून की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।

महिलाओं के पास कौन कौन से कानूनी अधिकार है?

हमारे भारतीय संविधान (Indian Constitution) में भारतीय नागरिकों को समानता का अधिकार (Right to equality) दिया गया है, जिसका वर्णन अनुच्छेद 14 से 18 तक (Articles 14 to 18) में किया गया है। जिनमें महिलाओं के लिए जरूरी अधिकार निम्न है-

1. कार्यस्थल में समान वेतन का अधिकार

2. घरेलू हिंसा (Domestic violence) से सुरक्षा का अधिकार

3. संपत्ति में समान अधिकार

4. महिलाओं को निःशुल्क कानूनी मदद का अधिकार

5. कार्यक्षेत्र में हुए उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार

 6. यदि महिलाओं से कोई गलती होती है, तो उन्हें रात के समय गिरफ्तार नहीं होने का अधिकार आदि।

कार्यस्थल में समान वेतन का अधिकार

जिस प्रकार पुरूषों को कार्यस्थल पर वेतन में समान अधिकार (Equal rights in salary) मिला है, उसी तरह महिलाओं को भी वेतन में समान अधिकार मिला है। लेकिन उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होने के चलते कम वेतन में काम करना पड़ता है। जिसके भारतीय संविधान में समान पारिश्रमिक अधिनियम (Remuneration act) बनाया गया है, जिसके अनुसार चाहे सैलरी हो या फिर मजदूरी हो महिला और पुरूष को समान वेतन का अधिकार (Right to equal pay) दिया गया है। जिसके बारे में प्रत्येक महिला को जानकारी होनी चाहिए।

घरेलू हिंसा के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार

अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं ज्यादातर घरेलू हिंसा का शिकार (Domestic violence victim) होती है। जिसमें कभी कभी महिला को अपनी जान भी गवांनी पड़ जाती है। ऐसे में महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा का अधिकार मिला है। जिसका उपयोग कर वे घरेलू हिंसा (Domestic violence) के खिलाफ आवाज उठा सकते है और उत्पीड़न से बच सकते है। घरेलू हिंसा से सुरक्षा का अधिकार (Right to protection from domestic violence) किसी भी तरह से महिलाओं के ऊपर होने वाले अत्याचार से उनकी रक्षा करने के लिए बनाया गया है। अक्सर देखा जाता है कि रिश्तेदारों द्वारा या फिर पति द्वारा अपनी पत्नी पर अत्याचार किया जाता है। कई बार लिव इन में रहने वाले महिलाओं को भी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है और ऐसा भी होता है कि घर में मां या बहन को भी घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ता है। जिसके कारण महिलाओं की सुरक्षा को लेकर घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिनियम बनाया गया है।

संपत्ति में समान अधिकार

पहले देखा जाता था कि संपत्ति में केवल बेटों को ही अधिकार मिलता था। लेकिन बाद में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के अनुसार अब महिला और पुरुष दोनों को ही संपत्ति में बराबर का अधिकार (Equal right in property) दिया जाता है। इस नियम को भी महिलाओं को जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि कई बार इन्हीं जानकारी के अभाव में महिलाओं को बेघर होना पड़ जाता है।

महिलाओं को निःशुल्क कानूनी मदद का अधिकार

समाज में सबसे ज्यादा अत्याचार महिलाओं पर देखा जा रहा है, जिसमें महिलाओं अपने हवस का शिकार बनाया जाता है। ऐसे में उन्हें कानूनी मदद पाने का अधिकार दिया गया है। जिसकी जिम्मेदारी स्टेशन हाउस ऑफिसर (Station House Officer) को दिया जाता है, जो विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal services authority) को वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचना पहुंचाता है। जिसके बाद पीड़िता को निःशुल्क में कानूनी मदद दी जाती है।

कार्यक्षेत्र में हुए उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार

समाज में ऐसे भी केस सामने आते हैं, जिसमें महिलाओं को कार्यक्षेत्र में यौन उत्पीड़न का शिकार (Sexual harassment victim) बनाया जाता है। ऐसे में महिलाओं को सुरक्षा (Women safety) को ध्यान में रखते हुए यौन उत्पीड़न अधिनियम बनाया गया है। जिसके तहत किसी भी महिला को अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के खिलाफ मामला (Sexual harassment case) दर्ज करने का पूरा अधिकार दिया गया है।

यदि महिलाओं से कोई गलती होती है, तो उन्हें रात के समय गिरफ्तार नहीं होने का अधिकार

कई बार महिलाओं को कई तरह के जुर्म में गिरफ्तार किया जाता है, लेकिन महिलाओं को रात में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। जैसे ही सूरज डूबता है उसके बाद किसी भी आरोप में महिला को गिरफ्तार नहीं करने का आदेश है। यदि कोई गंभीर मामला है तब पहले मजिस्ट्रेट से महिला की गिरफ्तारी के लिए आदेश लेना पड़ेगा उसके बाद उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। इस अधिकार के बारे में भी महिलाओं को जागरूक होना अति आवश्यक है, क्योंकि जानकारी के आभाव में महिलाओं के साथ गलत काम भी हो सकते है। इसलिए उन्हें अपने अधिकारों का ज्ञान होना जरूरी है।

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हमने इस लेख में महिलाओं को मिलने वाले सुरक्षा और समानता के अधिकार (Right to equality) के संबंध में कुछ विशेष जानकारी साझा की है। जिसकी मदद से महिलाएं अपने कानूनी अधिकार के बार जान सकती है, क्योंकि महिला अपराध में काफी बढ़ोतरी हो रही है, ऐसे में उन्हें हर समय जागरूक होना जरूरी है। जिससे वे अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकेंगी।

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