A boy converted tree as isolation ward

घर में आइसोलेशन की जगह नहीं मिली तो तेलंगाना के शिवा ने खुद को पेड़ पर किया आइसोलेट

अजब गजब कोरोना भारत

कोरोनावायरस (Corona Virus) का तांडव देश में अभी भी जारी है, कई लोग इसकी चपेट में आने के बाद अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे हैं। कोरोना वायरस (Corona Virus) के फैलते संक्रमण के चलते राज्य सरकारों (State Government) द्वारा कोरोना कर्फ्यू (Corona Curfew) लगाया गया है और लोगों ने खुद को घरों में कैद कर लिया है। इसके साथ ही सरकार द्वारा भी कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों के लिए हिदायत और एडवाइजरी जारी की गई है, जिससे अन्य लोग इससे प्रभावित ना हो। सभी जानते हैं कि कोरोना वायरस शहर में ही नहीं बल्कि गांव में भी अपने पैर पसार चुका है, जिसने शासन और प्रशासन दोनों को ही चिंता में डाल दिया। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए जारी की गई गाइडलाइन (Corona Virus guidelines) के हिसाब से अगर कोई व्यक्ति संक्रमित है तो उसे खुद को अपने परिवार के अन्य सदस्यों से आइसोलेट (Isolate) कर लेना चाहिए, लेकिन देश में कुछ ऐसे परिवार भी हैं जो एक कमरे के मकान में रहते हैं, जिनके लिए खुद को एक अलग कमरे में आइसोलेट (Isolate) करना काफी मुश्किल भरा काम हो जाता है। कुछ ऐसा ही मामला दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य (Telangana states) से सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने खुद को आइसोलेट करने के लिए पेड़ का सहारा ले लिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना स्टेट (Telangana states) के नालगोंडा जिले में होम आइसोलेशन (Home isolation) की जगह कम पड़ने के चलते  18 वर्ष के नौजवान शिवा ने खुद को अपने परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखने के लिए एक पेड़ पर कोविड-19 का आइलोसेसन वार्ड (Isolation Ward) बना डाला। शिवा ने पेड़ की शाखाओं में बास बांधी है और झाड़ियों से उसका बिस्तर बना लिया, इस तरह उसने खुद को अपने परिवार से आइसोलेट करने का इंतजाम कर लिया है।

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इस तरह किया शिवा ने खुद को परिवार वालो से आइसोलेट

गौरतलब है कि 4 मई को नालगोंडा जिले के अंदरूनी इलाके में बसे एक आदिवासी गांव (Tribal Village) कोठानंदीकोंडा के रहने वाले शिवा की कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद गांव वालों ने उसे अपने घर पर ही रहने की हिदायत दी और अपने परिवार से अलग रहने के लिए भी कहा। लेकिन शिवा का घर ज्यादा बड़ा नहीं था जिसके कारण उसे खुद को आइसोलेट करने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। शिवा ने खुद को दूसरों से आइसोलेट करने के चलते पेड़ पर अपना आशियाना बना लिया और वह 11 दिनों से अपने घर वालों से अलग पेड़ पर रह रहा है। वही आपको  बता दें कि तेलंगाना राज्य के नालगोंडा जिले के आदिवासी गांव कोठानंदीकोंडा में करीब 350 परिवार रहते हैं। यहां के रहने वाले निवासी बताते हैं कि इस इलाके से सबसे पास में जो स्वास्थ्य केंद्र है वह यहां से 5 किलोमीटर दूर है। यदि इस बस्ती में रहने वाले लोगों को कोई हेल्थ इमरजेंसी आ जाती हैं तो उन्हें 30 किलोमीटर दूर बसे अस्पताल में अपना इलाज करवाना पड़ता है।

घर में नहीं थी आइसोलेट होने की जगह, पहले दिन बताई शिवा ने घर के बाहर रात

वही खुद को एक पेड़ पर आइसोलेट करने को लेकर शिवा बताते हैं कि वह 4 मई को कोरोनावायरस पाए गए थे जिसके बाद डॉक्टर ने उन्हें खुद को अपने घरवालों से आइसोलेट करने की और सावधानी बरतने की हिदायत दी लेकिन घर छोटा होने के चलते इस आइसोलेशन के लिए जगह नहीं थी। शिवा आगे बताते है कि मैं अपने माता पिता और बहन के साथ रहता हूं। जिस दिन में कोरोनावायरस पाया गया था, उस दिन की रात मैंने घर के बाहर ही गुजारी थी। वहीं उन्हें आईडिया आया कि क्यों ना पेड़ को अपना ठिकाना बना लिया जाए, शिवा ने अपनी चारपाई को पेड़ से बांध दिया ताकि वह गिरे ना और वह कई दिनों से पेड़ पर खुद को आइसोलेट कर रह रहे हैं।

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शिवा ने बताया किस तरह पेड़ पर आइसोलेट कर के खुद को रखते है व्यस्थ

शिवा आगे बताते हैं कि इस तरह खुद को आइसोलेट करना उनके लिए आरामदायक है। वही उनकी मां नाश्ता, लंच और डिनर पेड़ ही के नजदीक रखी हुई कुर्सी पर रख जाती है और वह नीचे आकर खाना खा लेते हैं। भोजन और शौच के सिवा वह पेड़ से नीचे नहीं उतरते हैं। शिवा आगे बताते हैं कि उनका गांव काफी छोटा है और आबादी भी एक हजार से कम है, इसके साथ ही गांव में कोरोना मरीज से संक्रमित हुए लोगों को आइसोलेट करने के लिए कोई आइसोलेशन सेंटर भी नहीं बना है। आगे शिवा कहते हैं कि कोरोनावायरस से संक्रमित पाए जाने के 10 दिन बाद उन्हें पता चला था कि जनजातीय छात्रों के लिए एक हॉस्टल में आइसोलेशन सेंटर (Isolation Centre) बनाया गया है लेकिन तब तक मैंने खुद को ही पेड़ पर आइसोलेट कर लिया था। शिवा कहते हैं कि कोरोनावायरस से कोई उनसे मिलने भी नहीं आ रहा है। वह बताते है कि अपना ज्यादातर वक्त पेड़ पर बैठकर किताबें पढ़ते हुए, गाने सुनते हुए और मोबाइल पर दोस्तों से बातचीत करते हुए बिताते हैं। वही शिवा आगे कहते हैं कि कोरोनावायरस से डरने की कोई जरूरत नहीं है, अगर आप पॉजिटिव सोच रखेंगे तो आप जल्द ही कोरोनावायरस पर जीत हासिल कर स्वस्थ्य और तंदुरुस्त हो जाएंगे

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